रचना चोरों की शामत

Saturday, 27 September 2014

फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे


माँ मेरी, थकते तो होंगे   
कर कोमल, या पाँव तुम्हारे?
मगर कह नहीं पाते होंगे
नेह, मोह, ममता
के मारे।   
 
जगा सुबह को, प्रथम बाँचती   
तुम घर की राहत का लेखा।     
जुटती फिर क्रमबद्ध, खींचकर
अपनी हर चाहत पर रेखा।              
 
सुन लेती हो माँ! हम सबको   
स्वयं किसी के बिना
पुकारे।
 
चक्र लगे शायद पैरों में
उस पल बाहर, इस पल अंदर
रूप तरसता, तुम्हें न परवा
फिर भी माँ, तुम कितनी सुंदर!
 
कभी न जाना, तुमने किस पल 
तेल मला या बाल
सँवारे।
 
महका करती पाक रसोई
स्नेहिल-स्वाद सजाते टेबल।
भाप उड़ातीं गरम रोटियाँ
हमें बुलातीं होकर बेकल  
 
बड़े नसीबों वाले हैं हम
खुशनसीब हैं भाग्य हमारे।
 
सुगढ़ गृहस्थी की चुनरी में   
माँ! तुमने हर सुख को टाँका
भली दुआ ने नज़र उतारी
बुरी बला ने कभी न झाँका
 
रब से बस अरदास यही है
फले मातृ-सुख द्वारे-द्वारे।

-कल्पना रामानी   

1 comment:

Annapurna Bajpai said...

सुन्दर रचना

पुनः पधारिए


आप अपना अमूल्य समय देकर मेरे ब्लॉग पर आए यह मेरे लिए हर्षकारक है। मेरी रचना पसंद आने पर अगर आप दो शब्द टिप्पणी स्वरूप लिखेंगे तो अपने सद मित्रों को मन से जुड़ा हुआ महसूस करूँगी और आपकी उपस्थिति का आभास हमेशा मुझे ऊर्जावान बनाए रखेगा।

धन्यवाद सहित

--कल्पना रामानी

Google+ Followers

Followers

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह"हौसलों के पंख"

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह"हौसलों के पंख"
संपर्क-अंजुमन प्रकाशन/ई मेल anjumanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब मेरी ओर से सिर्फ आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क- kalpanasramani@gmail.com-

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह "खेतों ने ख़त लिखा"

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह "खेतों ने ख़त लिखा"
संपर्क-अयन प्रकाशन ई मेल-ayanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क- kalpanasramani@gmail.com

मेरा प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह "मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी"

मेरा प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह "मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी"
संपर्क- अयन प्रकाशन-ई मेल ayanayanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क -- kalpanasramani@gmail.com

मेरी प्रकाशित ई बुक

पुरस्कार/सम्मान

पुरस्कार/सम्मान
मेरे प्रथम नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" के लिए पूर्णिमा जी द्वारा नवांकुर पुरस्कार/सम्मान ग्रहण करते हुए