रचना चोरों की शामत

Sunday, 11 September 2016

बाँसुरी में सुर न हो तो

बांसुरी के लिए चित्र परिणाम
बाँसूरी में सुर न हो तो  
प्राण, धुन कैसे
बुनेंगे?

जो हुए तरुवर पुराने
छोड़ना निज स्थान होगा
पौध-नूतन-जन्म से ही
सर्व का उत्थान होगा

अंकुरण फिर-फिर न हों तो 
फल सरस कैसे
उगेंगे?

सुर कहें यदि श्रेष्ठ हम ही
राग का अपमान है ये
जानकर अंजान बनता
क्योंकि मन, नादान है ये

रागिनी में रस न हो तो
साज़ फिर कैसे
बजेंगे?

है ज़रूरी आरियाँ जानें
सुई भी कीमती है
आम है माना मधुर
गुणवान कड़वा नीम भी है

काटने की होड़ हो तो
बाँटने कैसे
बढ़ेंगे?

बोलियाँ लगती हुईं लख
है व्यथित साहित्य सागर
दान औ प्रतिदान की
खाली पड़ी है आज गागर

यदि जगह कागज़ न दे तो
क्यों कलम के कर
चलेंगे?

-कल्पना रामानी

No comments:

पुनः पधारिए


आप अपना अमूल्य समय देकर मेरे ब्लॉग पर आए यह मेरे लिए हर्षकारक है। मेरी रचना पसंद आने पर अगर आप दो शब्द टिप्पणी स्वरूप लिखेंगे तो अपने सद मित्रों को मन से जुड़ा हुआ महसूस करूँगी और आपकी उपस्थिति का आभास हमेशा मुझे ऊर्जावान बनाए रखेगा।

धन्यवाद सहित

--कल्पना रामानी

Google+ Followers

Followers

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह"हौसलों के पंख"

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह"हौसलों के पंख"
संपर्क-अंजुमन प्रकाशन/ई मेल anjumanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब मेरी ओर से सिर्फ आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क- kalpanasramani@gmail.com-

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह "खेतों ने ख़त लिखा"

मेरा प्रकाशित नवगीत संग्रह "खेतों ने ख़त लिखा"
संपर्क-अयन प्रकाशन ई मेल-ayanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क- kalpanasramani@gmail.com

मेरा प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह "मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी"

मेरा प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह "मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी"
संपर्क- अयन प्रकाशन-ई मेल ayanayanprakashan@gmail.com/मित्रों के लिए यह किताब आधी कीमत पर उपलब्ध है। संपर्क -- kalpanasramani@gmail.com

मेरी प्रकाशित ई बुक

पुरस्कार/सम्मान

पुरस्कार/सम्मान
मेरे प्रथम नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" के लिए पूर्णिमा जी द्वारा नवांकुर पुरस्कार/सम्मान ग्रहण करते हुए